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सांस से संबंधित सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन
सांस लेने को सà¥à¤µà¤¾à¤¯à¤¤à¥à¤¤ तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° (ऑटोनोमिक नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® या ANS) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जाता है, तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° का वह हिसà¥à¤¸à¤¾ जो सà¥à¤µà¤šà¤¾à¤²à¤¿à¤¤ रूप से या आपके चेतन नियंतà¥à¤°à¤£ से बाहर कारà¥à¤¯ करता है। सांस लेने के बारे में दिलचसà¥à¤ª बात यह है कि आप सà¥à¤µà¥‡à¤šà¥à¤›à¤¾ से गहरी सांस लेते हà¥à¤, खाà¤à¤¸à¤¤à¥‡ हà¥à¤ और अपनी सांस रोककर इसे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकते हैं। शरीर की अधिकांश ANS नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¤• सचेत 'ओवरराइड’ कारà¥à¤¯ की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ नहीं देती हैं। सà¥à¤µà¤šà¤¾à¤²à¤¿à¤¤ नियंतà¥à¤°à¤£ के साथ, सांस पर कà¥à¤› सचेत पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ होने से इस पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ के रखरखाव का महतà¥à¤µ पता चलता है।
हवा से ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ निकालने के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से फेफड़ों, या सांस दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ वायॠको अंदर लिया जाता है। ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ फेफड़ों में à¤à¤²à¥à¤µà¤¿à¤¯à¥‹à¤²à¥€ नामक छोटी नलिकायों से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥€ है। à¤à¤²à¥à¤µà¤¿à¤¯à¥‹à¤²à¥€ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ के अणà¥à¤“ं को रकà¥à¤¤à¤ªà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ में जाने देती है। फिर ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ अणॠशरीर में सà¤à¥€ कोशिकाओं तक वितरित किया जाता है। जब ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ का शरीर दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ चयापचय किया जाता है, तो कारà¥à¤¬à¤¨ डाइऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ रकà¥à¤¤ में छोड़ दिया जाता है। कारà¥à¤¬à¤¨ डाइऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ अपशिषà¥à¤Ÿ को फेफड़ों में वापस ले जाया जाता है जहां इसे हवा में वापस छोड़ दिया जाता है।
सांस को कई कारकों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जाता है। सांस लेने में मà¥à¤–à¥à¤¯ केंदà¥à¤°à¥€à¤¯ तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° (सेंटà¥à¤°à¤² नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® या CNS) का नियंतà¥à¤°à¤£ दिमाग में है। रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ की चोट या बà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤® में कोई सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• अकà¥à¤¸à¤° शà¥à¤µà¤¾à¤¸ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। शà¥à¤µà¤¸à¤¨ में शामिल पà¥à¤°à¤®à¥à¤– नसों में फ़ेरेनिक तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा, वेगस तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा, और पीछे की थॉरेसिक तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤ शामिल हैं।
डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® शरीर में हवा खींचने के लिठफेफड़ों को नीचे खींचने के लिठज़िमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° है। डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® को फेरनिक तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जाता है जो रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ में C3, C4 और C5 सà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤‚ पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। इन सà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤‚ पर à¤à¤• चोट सांस लेने के डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® नियंतà¥à¤°à¤£ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करेगी। मांसपेशियों का à¤à¤• दूसरा समूह, इंटरकोसà¥à¤Ÿà¤² मांसपेशियां, हवा के फेफड़ों में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करने में सहायता करता है। इंटरकोसà¥à¤Ÿà¤² मांसपेशियां पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• रिब के बीच होती हैं। फेफड़े के इरà¥à¤¦-गिरà¥à¤¦, इन मांसपेशियों के कारण फेफड़े बाहर की ओर निकलते हैं। वे पसलियों को ऊपर ओर बाहर की ओर उठाकर à¤à¤¸à¤¾ करते हैं और फेफड़ों में हवा लाने में सहायता करते हैं। इंटरकोसà¥à¤Ÿà¤² मांसपेशियों को रीढ़ की तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं T1 से T11 दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जाता है। रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ की चोट जिसमें ये सà¥à¤¤à¤° शामिल हों, इंटरकोसà¥à¤Ÿà¤² मांसपेशियों की कारà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करेगी। मांसपेशियों का à¤à¤• तीसरा समूह, जो फेफड़ों में नकारातà¥à¤®à¤• दबाव बनाकर फेफड़ों में हवा खींचने में मदद करता है, वह पेट की मांसपेशियां हैं। इन मांसपेशियों को रीढ़ की तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं T7 से L1 दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जाता है। रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ की चोट जिसमें ये सà¥à¤¤à¤° शामिल हों, कà¥à¤› इंटरकोसà¥à¤Ÿà¤² मांसपेशियों और पेट की मांसपेशियों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करेगी। गरà¥à¤¦à¤¨ सहित अनà¥à¤¯ मांसपेशियां à¤à¥€ सांस लेने में सहायता करती हैं।
हवा को बाहर निकालने के लिà¤, शरीर में हवा लाने वाली मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं। मांसपेशियों के समूहों की इस शिथिलता से फेफड़े अपने आरामदायक आकार में लौट आते हैं जिससे शरीर से हवा बाहर निकल जाती है। शरीर से ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ रहित हवा और कारà¥à¤¬à¤¨ डाइऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ बाहर निकालते हैं। सांस की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को केवल मांसपेशियों की सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ से पूरा किया जा सकता है लेकिन फेफड़ों से हवा छोड़ने के लिठमांसपेशियों को काम करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होती है, वे बस आराम करती हैं, और हवा निषà¥à¤•ासित हो जाती है। मांसपेशियां अपने आप हवा को बाहर नहीं धकेलती हैं। आप सचेत रूप से अपनी मांसपेशियों को शरीर से हवा को बाहर निकालने के लिठसकà¥à¤°à¤¿à¤¯ कर सकते हैं, लेकिन पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से सांस लेने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में हवा अपने आप बाहर निकल जाà¤à¤—ी।
रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ की चोट के बाद सांस संबंधी तीवà¥à¤° समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚
रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ की चोट के बाद, शà¥à¤µà¤¾à¤¸ के कई पहलू पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकते हैं। चोट के सà¥à¤¤à¤° के आधार पर, सà¥à¤µà¤¾à¤¯à¤¤à¥à¤¤ तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° (ऑटोनोमिक नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® या ANS) जो सांस लेने की सà¥à¤µà¤šà¤¾à¤²à¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करती है, पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है। सांस को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने की सचेत कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है जैसे कि फेफड़ों और/या खाà¤à¤¸à¥€ में वायॠमारà¥à¤— को खोलने के लिठगहरी सांस लेने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾, शà¥à¤µà¤¸à¤¨ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ के सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• तंतà¥à¤°à¥¤ चोट के सà¥à¤¤à¤° पर और नीचे हवा अंदर लेने के मांसपेशी के कारà¥à¤¯ करने की ताकत पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है। टोन (लोच) सांस की मांसपेशियों के तीन समूहों की शिथिलता को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है जिससे सांस को अंदर और बाहर लेना जटिल बन जाता है। बोली में परिवरà¥à¤¤à¤¨ हो सकता है।
यदि C2 या इससे ऊपर पकà¥à¤·à¤¾à¤˜à¤¾à¤¤ होता है, तो फेरिक तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है और इसलिठडायाफà¥à¤°à¤¾à¤® कारà¥à¤¯ नहीं करता है। सांस को सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤œà¤¨à¤• बनाने के लिठयांतà¥à¤°à¤¿à¤• वेंटिलेशन की आवशà¥à¤¯à¤•ता होगी। SCI सांस संबंधी देखà¤à¤¾à¤² में पà¥à¤°à¤—ति के कारण, C3 या C4 में रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ की चोट वाला कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ यांतà¥à¤°à¤¿à¤• वेंटिलेशन के उपयोग के बिना या आंशिक उपयोग के साथ सांस लेने में सकà¥à¤·à¤® हो सकता है। इन दो सà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤‚ पर, डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® कà¥à¤› कारà¥à¤¯ को बनाठरख सकता है लेकिन हो सकता है इंटरकोसà¥à¤Ÿà¤², छाती की दीवार की अनà¥à¤¯ मांसपेशियों और पेट की मांसपेशियों छाती की ऊपरी दीवार का à¤à¤•ीकृत विसà¥à¤¤à¤¾à¤° पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ न कर सकें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सांस खींचने के दौरान डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® उतरता है।
रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ की चोट के बाद का पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• चरण, उचà¥à¤š सà¥à¤¤à¤° की चोटों में रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ के à¤à¤Ÿà¤•े के दौरान, फà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥€à¤¡ इंटरकोसà¥à¤Ÿà¤² मांसपेशियों छाती की दीवार को अंदर आने देती हैं जब कि इंटरकोसà¥à¤Ÿà¤² मांसपेशियों को बाहर खींचना चाहिà¤à¥¤ इस असंतà¥à¤²à¤¨ के परिणाम-सà¥à¤µà¤°à¥‚प कम कà¥à¤¶à¤² सांस, वायà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— का पतन, सांस लेने के लिठअधिक कारà¥à¤¯à¤à¤¾à¤° और फेफड़ों के थैली के छोटे पतन हो सकते हैं। सांस लेने की मांसपेशियाठकठोर हो सकती हैं जिसके कारण सांस के लिठसà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯à¤²à¤¾à¤ धीमा हो जाता है। मांसपेशियों की लोच कम हो सकती है जो या तो सांस लेने की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को कम कर सकती है या अति-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ के कारण सांस लेना और à¤à¥€ मज़बूत बना देती है। SCI के तीवà¥à¤° चरणों के दौरान, सूजन या रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ की निरंतरता या समाधान के आधार पर चोट का सà¥à¤¤à¤° अधिक या कम हो सकता है।
मधà¥à¤¯-थॉरैसिक और उससे ऊपर के सà¥à¤¤à¤° पर पकà¥à¤·à¤¾à¤˜à¤¾à¤¤ वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को गहरी सांस लेने और बलपूरà¥à¤µà¤• सांस छोड़ने में परेशानी हो सकती है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनके पास पेट या इंटरकोसà¥à¤Ÿà¤² मांसपेशियों का उपयोग नहीं हो सकता है, ये वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¤• मजबूत खाà¤à¤¸à¥€ को धकेलने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ à¤à¥€ खो देते हैं। इससे फेफड़ों में जमाव और शà¥à¤µà¤¸à¤¨ संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है।
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